about

'जन मीडिया' एक ऐसे संस्थान की परिकल्पना को लेकर चल रहा है जिसकी प्राथमिकता गांधी के अंतिम आदमी का जीवन होगा। हिन्दुस्तान जैसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में मीडिया की हालत किसी से छुपी नहीं है, ऐसे में 'जन मीडिया' आम जन की स्थिति को सामने लाने की कोशिश करेगा। मीडिया की हाल के दशक में उभरी बीमारियों, जैसे - पेड न्यूज, निजी लाभ के लिए मीडिया का उपयोग, भ्रष्ट भाषा का प्रयोग कर किसी तरह की सजगता और चेतना के प्रचार-प्रसार की जगह मात्र चौंकाना और भीड़ पैदा करना आदि से सभी परिचित हैं। यह सब हमारा उद्देश्य नहीं होगा। पत्रकारिता हमारे लिए व्यापार नहीं बल्कि जनता को अपने अधिकारों व कर्तव्यों के प्रति सजग करने का एक टूल या उपकरण होगा। 'जन मीडिया' व्यक्तिगत लाभ के बरक्स सामाजिक उत्थान के लिए काम करेगा। आमलोगों का आज मीडिया से विश्वास उठता जा रहा, वह विश्वास हम फिर से कायम करना चाहेंगे। लोकतंत्र के ‘चौथे स्तंभ’ के रूप में मीडिया की खत्म होती प्रासंगिकता को हम फिर से बहाल करने की कोशिश करेंगे। संस्थान को स्वतंत्र और समर्थ बनाए रखने के लिए हमलोग अपने समाज के प्रबुद्ध जनों को इससे जोड़ने की नीति पर चलते हुए उनसे सामाजिक और आर्थिक आधार प्राप्त करने की कोशिश करेंगे। हम चाहेंगे कि जनचेतना वाले पत्रकार हमसे जुड़ने की पहल करें। 'जन मीडिया' के सरोकार लोकतांत्रिक आदर्शों और व्यापक जनहित को तरजीह देने वाले होंगे। अपने पाठकों और संस्थान से जुड़े लोगों से हम आशा करेंगे कि वे हमारी वेबसाइट, चैनल आदि को पढें, देखें और सोशल माध्यमों पर शेयर करें व जन जन तक हमारी बात को पहुंचाने का प्रयास करें। स्वस्थ समालोचना के लिए यहां हमेशा जगह होगी। तीन दशकों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय योगदान दे रहे मीडिया कर्मियों की इस पहल का उद्देश्य आने वाली पीढ़ी के लिए स्वच्छ और निर्भीक पत्रकारिता की नई जमीन तैयार करना है।